आशियाना बनाना हैं आज

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आशियाना बनाना हैं आज
कुछ तिनके तुम ले आओं
कुछ मट्टी मैं ले आऊं

आशियाना बनाना हैं आज

अपनी ज़िन्दगी टटोलकर
कुछ सपने तुम चुन लाओं
ख्वाइशों की किताब मैं से
कुछ पन्ने मैं फाड़ लाऊं

आशियाना बनाना हैं आज

ज़िन्दगी की कड़वाहट के
कुछ आसूं तुम पी जाओं
कुछ गम मैं भूल जाऊं
आशियाना बनाना हैं आज

घर की सफ़ेद दीवारों पर
रंगों की दुनिया से चुन कर
कुछ रंग अपने लिए
कुछ रंग मेरे लिए समेट लाओं

आशियाना बनाना हैं आज

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14 thoughts on “आशियाना बनाना हैं आज

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    • 🙂

      This poem is about making a home. the title means lets build a home ( not a house) today.

      lets borrow some colors, let go off of our pain and bring in our dreams and aspirations. Let’s build a home today..

      Like

  4. यह बहुत सुंदर कविता है. आप वास्तव में एक प्रतिभाशाली कवि हैं. इस सुंदर कविता के लिए धन्यवाद. तुम्हारे लिए मेरी शुभकामनाएं.

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